सिंह (Leo) लग्न

सिंह (Leo) लग्न
सिंह क्षितिज पर उदित होने वाला पाँचवाँ लग्न है। इसका प्रतीक उग्र सिंह है। इसकी चाल राजसी और स्वभाव राजा जैसा होता है। यह लग्न सूर्य के सर्वोच्च स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है, जो ऐसी अग्नि के साथ प्रकट होता है जो नष्ट भी करती है और शुद्ध भी। कालपुरुष के शरीर में सिंह लग्न उदर (पेट) पर शासन करता है। पेट अग्नि का स्थान है, जहाँ भोजन का विघटन और शुद्धिकरण होता है, जिससे पाचन प्रक्रिया पूर्ण होती है। पाचन के अंतिम उत्पाद रक्त के माध्यम से शरीर और मन को पोषण देते हैं।
सिंह लग्न के जातक अपने राजसी व्यक्तित्व और जन्मजात नेतृत्व क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इनके भीतर स्वाभाविक गरिमा और आत्मविश्वास होता है जो दूसरों को स्वतः आकर्षित करता है। इनकी प्रभावशाली उपस्थिति और चुंबकीय व्यक्तित्व इन्हें स्वाभाविक रूप से ध्यान का केंद्र बना देता है।
सिंह लग्न और इसका स्वामी
सिंह लग्न का स्वामी सूर्य है, जो जीवन में शक्ति और सामर्थ्य से भरे मार्ग का संकेत देता है। सिंह रात्रि को त्याग कर दिन में सक्रिय होता है। सूर्य की प्रखर किरणें सिंह के भीतर छिपी आत्म-अभिव्यक्ति की तीव्र ऊर्जाओं को सक्रिय करती हैं।
सिंह एक चतुष्पाद राशि है। इसके चार पाँव इसे दृढ़ और स्थिर चाल प्रदान करते हैं—एक ऐसी चाल जो लक्ष्य पर केंद्रित, अडिग और दूरदर्शी होती है। यही कारण है कि सिंह लग्न के जातक शुरू किए गए कार्यों को पूर्ण करने में अत्यंत सक्षम होते हैं। चाहे मार्ग कितना भी कठिन क्यों न हो, वे सुविधा के लिए दिशा नहीं बदलते।
सिंह लग्न का तत्व, रंग और गुण
सिंह लग्न का शासक तत्व अग्नि है। अग्नि आवश्यकता पड़ने पर सिंह के प्रतिक्रियाशील मन को सक्रिय करती है। यह तत्व सूक्ष्म, तीव्र और शक्तिशाली होता है, जो सिंह को आगे बढ़ने की राह में आने वाली हर बाधा को बलपूर्वक हटाने की क्षमता देता है।
महर्षि पराशर सिंह को "बैंगनी" रंग से संबोधित करते हैं। यह रंग आध्यात्मिकता, सक्रिय चेतना, निस्वार्थ प्रेम, मौलिकता और सृजनशीलता का प्रतीक है। सिंह कर्मप्रधान नहीं होता—क्योंकि वह राजा है। अपने निचले अहंकार के विनाश के बाद, इसका शुद्ध मन उदार और परोपकारी बन जाता है। सिंह एक सात्त्विक राशि है और इसमें मानवतावादी दृष्टिकोण होता है।
अपनी अंतर्निहित अग्नि के माध्यम से सिंह निचले अहंकार का दहन करता है और उसे शुद्ध कर मानव बुद्धि को जीवन के उच्च उद्देश्य की ओर निर्देशित करता है।
सक्रिय चेतना और निस्वार्थ प्रेम सिंह मन के राजसी पथ को निर्धारित करते हैं। यह आध्यात्मिक त्रयी सिंह को एक मानवीय हृदय वाले राजा के रूप में स्थापित करती है।
सिंह लग्न की दिशा और प्रवृत्ति
सिंह पूर्व दिशा का स्वामी है—वही दिशा जहाँ से इसका स्वामी सूर्य उदित होता है। सिंह लग्न की प्रकृति पुरुषत्व से युक्त होती है। सिंह जातक जीवन को पूर्णता के साथ जीने में विश्वास रखते हैं। इनका प्रभाव अक्सर ‘जीवन से बड़ा’ माना जाता है और इनकी उपस्थिति भव्य व अनदेखी न की जा सकने वाली होती है। यह एक सकारात्मक ऊर्जा से युक्त लग्न है।
सिंह अपनी अडिग और सकारात्मक ऊर्जा को बाह्य संसार में खुलकर प्रवाहित करता है। यह ऐसे स्थानों में निवास करता है जहाँ इसकी ऊर्जा स्वतंत्र रूप से बह सके—जैसे जंगल, दुर्ग, पहाड़ियाँ, अग्निकुंड, भट्टियाँ, सूर्य कक्ष और शिव मंदिर।
सिंह लग्न के चक्र और आयुर्वेदिक दोष
अग्नि तत्व से उत्पन्न पित्त दोष सिंह लग्न में प्रमुख होता है। पित्त सिंह को कुछ हद तक तैलीय, उग्र और उष्ण बनाता है। सिंह स्पष्ट वक्ता होता है और दूसरों की सोच को भेदने की क्षमता रखता है। आज्ञा चक्र के प्रभाव में सिंह सहज रूप से अंतर्ज्ञानी, तीक्ष्ण बुद्धि वाला और आदेश देने वाला राजा बनता है।
आज्ञा चक्र अंतर्ज्ञान और उच्च ज्ञान को नियंत्रित करता है, जिससे सिंह जातक स्वभाव से ही आत्मविश्वासी, प्राधिकृत और निर्णायक होते हैं।
सिंह लग्न और नक्षत्र
सिंह लग्न में मघा, पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र आते हैं। इनके अधिष्ठाता देवता पितर, भगवान शिव और आर्यमा हैं, जो अदिति माता के तृतीय और चतुर्थ पुत्र हैं।
पितर कुल के प्रधान होते हैं और उन्हें कृपालु तथा उग्र दोनों माना जाता है—जो सिंह के बादलों जैसे गरजते स्वभाव को दर्शाता है। भगवान शिव कामनाओं और वासनाओं का नाश करते हैं। वे सिंह को इंद्रियों में स्थिर रखते हुए उच्च चेतना की ओर प्रेरित करते हैं। आर्यमा वरदान देने वाले देवता हैं। उत्तरा फाल्गुनी का "संरक्षक तारा" सिंह को सहायता और सेवा के लिए प्रेरित करता है।
सिंह लग्न के शारीरिक लक्षण
सिंह जातकों का व्यक्तित्व उनके नाम के अनुरूप आकर्षक होता है। इनकी कमर पतली और शरीर पुष्ट होता है। अंग लंबे, लचीले और सुगठित होते हैं। मांसपेशियाँ शक्तिशाली और हड्डियाँ मजबूत होती हैं। इनका रंग हल्का लालिमा लिए होता है और ऊपरी शरीर निचले शरीर की तुलना में अधिक शक्तिशाली होता है।
इनका चेहरा गोल, आँखें तीव्र और दृष्टि स्थिर होती है। बाल हल्के रंग के होते हैं और कम उम्र में गंजेपन की प्रवृत्ति हो सकती है। घुटने और कंधे मजबूत होते हैं, जिससे इनकी मुद्रा सीधी और राजसी प्रतीत होती है।
सकारात्मक और नकारात्मक गुण
सकारात्मक गुण
नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, साहस, उदारता, गरिमा, दूरदर्शिता, अधिकारपूर्ण व्यक्तित्व।
नकारात्मक गुण
अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, अधीरता, अत्यधिक प्रभुत्व, शक्ति की भूख।
सिंह लग्न में प्रत्येक ग्रह का महत्व
सूर्य
सूर्य लग्न और प्रथम भाव का स्वामी है। यह ग्रह व्यक्तित्व को नियंत्रित करता है और सिंह को तेज, गौरव और प्रभाव प्रदान करता है।
चंद्रमा
चंद्रमा द्वादश भाव का स्वामी है। यह भाव तटस्थ होता है, इसलिए चंद्रमा सिंह के लिए तटस्थ प्रभाव देता है।
मंगल
मंगल चतुर्थ और नवम भाव का स्वामी है। दोनों भाव शुभ हैं, इसलिए मंगल सिंह के लिए लाभकारी होता है।
बुध
बुध द्वितीय और एकादश भाव का स्वामी है। एकादश भाव अशुभ होने से बुध सिंह के लिए अशुभ ग्रह बन जाता है।
गुरु
गुरु पंचम और अष्टम भाव का स्वामी है। दोनों भाव शुभ हैं, अतः गुरु सिंह के लिए शुभ ग्रह है।
शुक्र
शुक्र तृतीय और दशम भाव का स्वामी है। सही स्थिति में यह योगकारक बन सकता है।
शनि
शनि षष्ठ और सप्तम भाव का स्वामी है। षष्ठ भाव अशुभ होने से शनि का प्रभाव मिश्रित होता है।


