क्या आपकी कुंडली में है पितृ दोष? जानिए इसके कारण और उपाय!

व्यक्ति की कुंडली में एक ऐसा दोष है जो सब दु:खों का कारण हो सकता है, इस दोष को 'पितृ दोष' के नाम से जाना जाता है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में उन्नति के मार्ग पर कई चीजें बाधा उत्पन्न करती है। व्यक्ति को जीवन के हर पड़ाव पर कुछ न कुछ बाधा का सामना करना ही पड़ता है। सामान्य तौर पर इन बाधाओं का कारण दोष को भी माना जाता है। जिनमें से कुछ दोष ज्ञात हो जाते हैं और कुछ दोष अज्ञात ही रह जाते हैं। इन्हीं अज्ञात दोषों में से एक दोष है 'पितृ दोष'।
आमतौर पर 'राहु' की विशेष स्थितियां ही पितृ दोष का निर्माण करती है। 'पितृ' का अर्थ है 'पितर अर्थात पूर्वज', किसी भी व्यक्ति के पूर्वजों की मृत्यु के उपरान्त किये जाने वाले श्राद्ध और संस्कार आदि, यदि उचित प्रकार से नहीं किये जाते तो पूर्वज की आत्मा तृप्त नहीं होती और नाराज हो कर श्राप दे देते हैं। यही 'पितृ दोष' बनकर कुंडली में उपस्थित हो जाता है और इसी की वजह से जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है।
इसके साथ ही पितृ दोष का एक वास्तविक कारण यह भी है कि पितरों की ओर व्यक्ति अपने फर्ज भूल जाते है जिसकी वजह से पितर दुखी हो जाते है और कुंडली में पितृ दोष लग जाता है। अपने पूर्वजों की अवहेलना करने से कुंडली में राहु की स्थिति खराब हो जाती है और वो पितृ दोष के माध्यम से सामने आते है।
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हर वर्ष गणेश चतुर्थी के बाद, पितृ पक्ष का पालन किया जाता हैं। पितृ पक्ष की अवधि 15 - 16 दिनों की होती है जिसमें आप अपने पूर्वजों को याद कर उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो लोग पितृ पक्ष का पालन करते हैं, वे न केवल अपने पूर्वजों को जीवन समाप्त होने के बाद एक शांतिपूर्ण मार्ग प्रदान करते हैं बल्कि अपने पूर्वजों से आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं।
यदि आप पितृ दोष से पीड़ित हैं तो उस दोष को दूर करने का सबसे उत्तम समय है पितृ पक्ष का समय, इस समय उपाय करना अधिक प्रभावशाली होता है। किसी भी व्यक्ति को पितृ दोष तब होता है जब उनके या उनके परिवार में किसी ने पूर्वजों का अनादर किया हो या उनको आहत किया हो।
पितृ दोष होने का एक और कारण यह भी होता है जब आपने कोई ऐसा कार्य किया हो जिससे आपके परिवार का नाम खराब हो या परिवार की बदनामी हो या आपके बड़ों का अपमान हो।
स वर्ष पितृ पक्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली सर्व पितृ अमावस्या या महालय को समाप्त होगी। इस वर्ष पितृ पक्ष पूर्णिमा 10 सितंबर और सर्व पितृ अमावस्या 25 सितंबर को पड़ रही है।
कुंडली में क्यों होता है 'पितृ दोष'
1. पूर्वजन्म का हिस्सा राहु होता है जो इस जन्म में कुंडली में पूर्व जन्म के कर्मों का फल देता है। यदि पूर्व जन्म में आपने अपनी माता-पिता की बात न मानी हो या उनकी अवहेलना की हो तो इस जन्म में आपकी कुंडली में राहु की स्थिति खराब होती है और वो 'पितृ दोष' के माध्यम से सामने आ जाता है।
2. यदि पूर्व जन्म में आपने अपने दायित्वों का ठीक तरीके से पालन न किया हो जैसे पूर्व जन्म में यदि आप पिता रहें हो और बच्चों और पत्नी की देखभाल न की हो या माता रहीं हो और अपने बच्चों और पति का ध्यान न रखा हो तो इसका प्रभाव इस जन्म में 'पितृ दोष' के रुप में जरुर मिलेगा।
3. पूर्व जन्म में यदि आपने अपने अधिकारों का और शक्तियों का दुरुपयोग किया हो इस जन्म में राहु नकारात्मक रुप में कुंडली में होगा और ऐसी स्थिति को ही पितृ दोष कहा जायेगा।
पितृ दोष के लक्षण
1. आपको अपने जीवन के हर क्षेत्र में अनेक समस्या का सामना करना पड़ सकता है फिर चाहे वो आपके करियर का क्षेत्र हो या आपके व्यक्तिगत जीवन का क्षेत्र या फिर आपके रोजगार का क्षेत्र, हर तरफ से आपको परेशानी झेलनी पड़ेगी।
2. आप न चाहते हुए भी अनेक परेशानियों में फंसते चले जायेंगे। आपकी तमाम कोशिशों के बाद भी आपके वैवाहिक जीवन में गम के बादल मंडराते रहेंगे, आपके वैवाहिक जीवन में आपके प्रयास के बाद भी खुशियाँ बनाये रखना मुश्किल हो जायेगा।
3. आपके कई नये शत्रु भी उत्पन्न हो सकते है साथ ही आप पुलिस के चक्कर में भी फंस सकते हैं।
4. रोजगार के क्षेत्र में आप अच्छा कार्य करके भी लोगों के द्वारा गलत ही समझें जायेंगे और आपके काम को भी प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।
5. आप पर कर्ज का बोझ हो जायेगा और आप वर्षों तक उस कर्ज से मुक्त नहीं हो पायेंगे।
6. पैसा कमाने के बाद भी आपको आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा।
पितृ दोष के निवारण के उपाय
कुंडली में लगे पितृ दोष की वजह से आपके जीवन में कुछ भी अच्छा और शुभ होने की संभावना कम हो जाती है, किन्तु ऐसी स्थिति में भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि आप पूरी आस्था से निम्न उपाय करते है तो आपको इस दोष से मुक्ति अवश्य मिल जायेगी।
1. पीपल के पेड़ की पूजा करें।
2. श्रीमद्भगवतगीता का रोज सुबह उठ कर पाठ करें। यदि रोज गीता पाठ करना आपके लिए संभव नहीं है तो कम से कम एक बार गीता के 11वें अध्याय का पाठ करें। गीता के पाठ का पूरा निचोड़ 11वें अध्याय में संकलित है।
3. पूजा के स्थान पर प्रतिदिन शाम के समय सरसों के तेल का एक दीपक दक्षिण की तरफ मुख कर के जलायें, ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है साथ वो प्रसन्न होते हैं।
4. आपको यदि ऐसा लगता है कि आपके किसी पूर्वज की आत्मा को शांति नहीं मिली है तो ऐसी दशा में भगवतगीता के पाठ का अनुष्ठान करवाने से उस आत्मा को मुक्ति मिल जाती है।
5. प्रत्येक वर्ष अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि पर उनके नाम का श्राद्ध करवायें। ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और आपको आशीर्वाद देते हैं।
6. श्राद्ध की क्रिया करते समय अपने पूर्वज को जल जरुर अर्पित करें।
7. मंदिरों में पूर्णिमा और अमावस्या वाले दिन पूर्वज के नाम से दान करें तथा गरीबों को भोजन करवायें।
8. अमावस्या वाले दिन ब्राह्मणों को भोजन करवायें।
9. उपर्युक्त निवारण उपाय यदि आप सच्ची श्रद्धा और पूरे मन से करेंगे तो आपको आपके पूर्वजों का आशीर्वाद जरुर प्राप्त होगा और आप 'पितृ दोष' नाम के ग्रह दोष से मुक्त हो जायेंगे।
पितृ दोष निवारण के उपाय के साथ-साथ निम्न मंत्रों के जाप से भी पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है:
1. भगवान शिव की प्रतिमा के सामने बैठ कर या उनके मंदिर में जा कर गायत्री मंत्र को जपने से पितृ दोष की बाधा दूर होती है। ये मंत्र इस प्रकार है- 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात' इस मंत्र का प्रतिदिन प्रातःकाल तथा संध्या काल में जाप करना लाभकारी साबित हो सकता है।
2. वैदिक शास्त्र के अनुसार सूर्य पिता का कारक होता है तो सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करते हुए 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करने से पितृ प्रसन्न हो जाते है।
3. अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनकी फोटो के सामने 'ॐ श्री सर्व पितृ दोष निवारणाय कलेशम हं हं सुख शांति देहि फट स्वाहाः' मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है।
4. पितृ दोष मुक्ति के लिए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः' का जाप भी श्रेष्ठकर होता है।
निम्नलिखित गतिविधियां आप अपने पूर्वजों के सम्मान में कर सकते हैं
1. अपने पूर्वजों को उनकी मृत्यु तिथि पर याद करें:
दादा-दादी, माता-पिता और परिवार के अन्य बुजुर्ग अपने जीवनकाल में या उसके बाद आपसे बहुत कुछ की उम्मीद नहीं करते हैं। आपकी ओर से आपके पूर्वज केवल प्यार, देखभाल और सम्मान महसूस करना चाहते हैं।
पितृ पक्ष के दौरान उनकी मृत्यु तिथि पर, उनकी फोटो को साफ करें, ताजे चंदन की एक माला उनकी फोटो पर चढ़ाएं और सामने एक घी का दीया जलाएं। उनके बारे में सोचने और उनकी आत्मा की मोक्ष के लिए प्रार्थना करने में कुछ समय बिताएं।
अपने बच्चों या परिवार के अन्य युवा लोगों को अपने पूर्वज के बारे में बताएं जिन्हें शायद उनके साथ समय बिताने का मौका न मिला हो।
2. तर्पण करें
ऐसा माना जाता है कि श्राद्ध काल में पितरों को जल चढ़ाने से उनकी आत्मा को तथा आपके मन को शांति मिलती है। वैसे तो इसे प्रतिदिन पितृ पक्ष में करना चाहिए। लेकिन यदि आप ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं, तो आपको अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि और सर्व पितृ अमावस्या पर अवश्य ही करना चाहिए।
के समय तांबे के बर्तन में पानी लें, चावल के दाने और कुछ काले तिल डालें। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके खड़े हो जाएं और अपने पूर्वजों के नाम लेकर उनको जल अर्पित करें। ऐसा करने के बाद गाय, कौए, कुत्ते और ब्राह्मण को खिलाने के लिए ताजा भोजन तैयार करें।
3. पिंड दान करें:
पिंड दान मुख्य रूप से पके हुए चावल और काले तिल से बने पकौड़ी के साथ की जाती है। यह मृत पूर्वजों के नाम पर कौवे को चढ़ाया जाता है। यह विधि व्यक्ति की मृत्यु के 12वें दिन, उनकी बरसी (मृत्यु के एक वर्ष बाद) पर, और जब उन्हें श्राद्ध में शामिल किया जा रहा हो, तब किया जाता है। यह पितृ पक्ष के दौरान उनकी श्राद्ध तिथि पर भी किया जा सकता है।
यदि आदर्श रूप से देखा जाए तो इस विधि को एक पवित्र नदी के तट पर या गया में एक पंडित के मार्गदर्शन में किया जाता है। लेकिन अगर आपके लिए यात्रा करना संभव नहीं है, तो आप इसे अपने घर में किसी पंडित की मदद से और उचित अनुष्ठानों का पालन करके भी कर सकते हैं।
ऐसा माना जाता है कि पिंडदान दिवंगत आत्मा को सांसारिक मोह से अलग करने में मदद करता है और उनकी आत्मा को पुनर्जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त करता है। इस विधि को करने से आपको उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा, जीवन में खुशियां आएगी और आपका स्वास्थ्य अच्छा होगा साथ ही आपके मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करके आपको लाभान्वित करता है।
4. ताजा और सात्विक भोजन करें:
भोजन जो आप खाते हैं और जो आप दिवंगत आत्माओं को अर्पित करते हैं, वह पितृ पक्ष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए अपने खाना पकाने की जगह को साफ रखना जरूरी है। इस दौरान घर में कोई भी मांसाहारी वस्तु लाने या कोई भी मांसाहारी व्यंजन बनाने से बचें।
खाना बनाने से पहले नहा लें और खाना पकाने के लिए केवल ताजी सामग्री का ही उपयोग करें। ऐसा खाना बनाने की कोशिश करें जो हल्का और सेहतमंद हो। पितृ पक्ष के दौरान अपने खाना पकाने में प्याज, लहसुन, दाल, चावल, मसूर, काली उड़द, हिंग, चना, जीरा और सरसों आदि का उपयोग करने से बचें। आपको शराब, सिगरेट या किसी भी अन्य नशीले पदार्थों जैसे तंबाकू आदि के सेवन से भी बचना चाहिए।
5. जरूरतमंदों को दान दें
जिन लोगों को जरूरत है उनको भोजन, वस्त्र, धन का दान दें। यदि आपके पूर्वज या कोई ऐसा व्यक्ति जो अब इस दुनिया में नहीं रहा और वो किसी चीज का दान करना चाहते थे आप उनके नाम पर वो दान कर सकते हैं।
इन चीजों के अलावा आप अपने पूर्वजों की याद में किसी अनाथालय, वृद्धों के घर या अस्पताल में भी कुछ समय बिता सकते हैं तथा उनके लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं।
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