श्वेताम्बरः श्वेतविभूषणश्च श्वेतद्युतिर्दण्डधरो द्विबाहुः । चन्द्रोऽमृतात्मा वरदः किरीटी मयि प्रसादं विदधातु देवः ।।

चंद्र मंत्र इसके लिए: ज्ञान की प्राप्ति।
जप की संख्या और आवृत्ति: प्रतिदिन 1 माला। चंद्र यंत्र के सामने मंत्र का जाप करें। सुबह नित्यकर्म से निवृत्त होकर मंत्र का जाप करें।