नवग्रह के बारे में जानें

मंगल

रक्ताम्बरो रक्तवपुः किरीटी चतुर्भुजो मेषगतो गदाभृत् । धरासुतः शक्तिधरश्च शूली सदायमस्मद् वरदः प्रसन्नः ।।

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मंगल

मंगल मंत्र इसके लिए: शीघ्र परिणाम।

जप की संख्या और आवृत्ति: प्रतिदिन 1 माला। मंगल यंत्र के सामने मंत्र का जाप करें। सुबह नित्यकर्म से निवृत्त होकर मंत्र का जाप करें।

मंगल ध्यान मंत्र

रक्ताम्बरो रक्तवपुः किरीटी चतुर्भुजो मेषगतो गदाभृत् । धरासुतः शक्तिधरश्च शूली सदायमस्मद् वरदः प्रसन्नः ।।

मंगल गायत्री मंत्र

ॐ क्षितिपुत्राय विद्महे लोहितांगाय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात् ।

मंगल पुराणोक्त जप मंत्र

ॐ भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत् सदा । वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीडां हरतु मे कुजः ।।

वेद व्यास कृत मंगल मंत्र

धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् । कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम् ।।

तंत्रोक्त मंगल मंत्र

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः । ॐ अं अंगारकाय य नमः ।