आपकी जन्म कुंडली (न कि केवल राशि) पर आधारित 18 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट।
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पैतृक ऋण (पितृ दोष) वाली कुंडलियों में ये चार संकेत बार-बार दिखाई देते हैं:
पैसा हमेशा देरी से आता हैरकम अक्सर सही होती है। लेकिन समय शायद ही कभी सही होता है।
हर काम में दो कोशिशें लगती हैंपहला प्रयास हमेशा बेवजह अटक जाता है। दूसरी बार में काम बनता है।
मदद उम्मीद से कम मिलती हैया इतनी देर से मिलती है कि उससे समस्या हल नहीं होती।
मेहनत का फल देर से मिलता हैआप किसी से भी ज्यादा मेहनत करते हैं, लेकिन उसका परिणाम बहुत बाद में दिखता है।
कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रुकता। बस जहाँ एक प्रयास लगना चाहिए, वहाँ दो लगते हैं। ज़्यादातर लोग इसे किस्मत या खराब समय मान लेते हैं। लेकिन वैदिक ज्योतिष में इसका एक नाम है, और आपकी कुंडली में इसका एक निश्चित स्थान है।
ज़्यादातर परिवारों में किसी ने जानबूझकर इन कर्मों (श्राद्ध/तर्पण) से मुँह नहीं मोड़ा। बस यह प्रथा शांति से तब खत्म हो गई, जब इसे जानने वाले बुजुर्ग नहीं रहे और उनके बाद किसी ने इसे आगे नहीं बढ़ाया।
लेकिन यह दायित्व अपने आप खत्म नहीं होता। यह पीढ़ियों से होते हुए उस व्यक्ति तक पहुँचता है जो वर्तमान में खड़ा है। यह कोई सज़ा नहीं थी और न ही इसमें आपकी कोई गलती है। यह एक ऋण (कर्ज़) है, और कर्ज़ चुकाए जाते हैं।
अपनी पितृ दोष रिपोर्ट प्राप्त करेंतैत्तिरीय संहिता के अनुसार, प्रत्येक मनुष्य तीन ऋणों के साथ जन्म लेता है। इनमें से एक 'पितृ ऋण' है, जिसे उनके नाम पर श्राद्ध, तर्पण और दान करके चुकाया जाता है।
जब यह ऋण एक या अधिक पीढ़ियों तक नहीं चुकाया जाता, तब वह 'पितृ दोष' बन जाता है।
पैतृक ऋण के उपाय पितृ पक्ष के दौरान ही अपना पूरा असर दिखाते हैं। गलत तिथि, गलत समय या गलत दिशा में किया गया तर्पण कोई फल नहीं देता। आपकी रिपोर्ट बताती है कि आपकी सटीक तिथि कौन सी है और इसे सही तरीके से कैसे करना है।
जल्दी ऑर्डर करें ताकि उपाय करने के लिए आपके पास पूरा पखवाड़ा हो। यदि आप 9 अक्टूबर तक इंतज़ार करेंगे, तो हो सकता है कि रिपोर्ट उस तिथि के बाद मिले जिसकी आपको सबसे ज्यादा ज़रूरत थी।
अपनी पितृ दोष रिपोर्ट प्राप्त करेंश्राद्ध किसी तय तारीख पर नहीं, बल्कि उस 'तिथि' पर किया जाता है जिस दिन पूर्वज का देहांत हुआ था। यदि वह तिथि ज्ञात नहीं है, तो 10 अक्टूबर को 'सर्वपितृ अमावस्या' के दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पूर्वजों का श्राद्ध किया जा सकता है।
| तारीख | दिन | श्राद्ध तिथि | यह किसके लिए है |
|---|---|---|---|
| 26 सितंबर | शनिवार | पूर्णिमा श्राद्ध | कुछ पंचांगों में इसे पहला दिन माना जाता है |
| 27 सितंबर | रविवार | प्रतिपदा श्राद्ध | पितृ पक्ष का आरंभ |
| 28 सितंबर | सोमवार | द्वितीया श्राद्ध | जिन पूर्वजों का देहांत इस तिथि को हुआ हो |
| 29 सितंबर | मंगलवार | तृतीया श्राद्ध | जिन पूर्वजों का देहांत इस तिथि को हुआ हो |
| 30 सितंबर | बुधवार | चतुर्थी श्राद्ध | जिन पूर्वजों का देहांत इस तिथि को हुआ हो |
| 1 अक्टूबर | गुरुवार | पंचमी श्राद्ध | जिन पूर्वजों का देहांत इस तिथि को हुआ हो |
| 2 अक्टूबर | शुक्रवार | षष्ठी श्राद्ध | जिन पूर्वजों का देहांत इस तिथि को हुआ हो |
| 3 अक्टूबर | शनिवार | सप्तमी श्राद्ध | जिन पूर्वजों का देहांत इस तिथि को हुआ हो |
| 4 अक्टूबर | रविवार | अष्टमी श्राद्ध | जिन पूर्वजों का देहांत इस तिथि को हुआ हो |
| 5 अक्टूबर | सोमवार | नवमी श्राद्ध | मातृ नवमी, माता और मातृ कुल की स्त्रियों के लिए |
| 6 अक्टूबर | मंगलवार | दशमी श्राद्ध | जिन पूर्वजों का देहांत इस तिथि को हुआ हो |
| 7 अक्टूबर | बुधवार | एकादशी श्राद्ध | जिन पूर्वजों का देहांत इस तिथि को हुआ हो |
| 8 अक्टूबर | गुरुवार | द्वादशी श्राद्ध | संन्यासियों के श्राद्ध के लिए भी मान्य |
| 9 अक्टूबर | शुक्रवार | त्रयोदशी / चतुर्दशी श्राद्ध | चतुर्दशी उन लोगों के लिए है जिनकी मृत्यु दुर्घटना या किसी अस्त्र-शस्त्र से हुई हो |
| 10 अक्टूबर | शनिवार | सर्वपितृ अमावस्या | सबसे महत्वपूर्ण दिन। ज्ञात और अज्ञात सभी पूर्वजों के लिए |
श्राद्ध कर्म सुबह नहीं, बल्कि 'अपराह्न काल' (सूर्योदय से दिन का चौथा पहर) में किया जाता है। कुछ पंचांग 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध से पखवाड़ा शुरू करते हैं और कुछ 27 सितंबर को प्रतिपदा से। दोनों ही पारंपरिक रूप से मान्य हैं, इसलिए अपने परिवार की परंपरा का पालन करें। आपकी रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताएगी कि आप पर कौन सी तिथि लागू होती है और उस दिन तर्पण कैसे करना है।
जन्म विवरण, चार कुंडलियां (लग्न, नवमांश, चंद्र कुंडली, कारकांश), सभी नौ ग्रहों का बल, और आपके पितृ भाव की स्थिति।
सीधा और स्पष्ट जवाब कि क्या आपकी कुंडली में पितृ दोष है, कौन से ग्रह इसे बना रहे हैं, और क्या चीज़ आपकी रक्षा कर रही है।
गरुड़ पुराण और बृहत् पराशर होरा शास्त्र वास्तव में क्या कहते हैं। कोई अंधविश्वास नहीं, कोई डर नहीं।
वे तीन मुख्य क्षेत्र जहाँ इसका सबसे ज्यादा प्रभाव है, और तीन अन्य क्षेत्र ताकि आप जीवन की हर परेशानी को पितृ दोष न मान लें।
दैनिक अभ्यास, ग्रहों के अनुसार साप्ताहिक दिन, मासिक और वार्षिक नियम, और आपके विशेष मंत्र। इनमें से किसी में भी पैसे का खर्च नहीं है।
यह कर्म कैसे किया जाता है, शास्त्रों के अनुसार इसे करने का अधिकार किसे है, और वे 4 गलतियां जो ज्यादातर लोग करते हैं।
जन्म की तारीख, समय और स्थान भरें।
यह किसी ऑटोमेटिक टेम्पलेट से नहीं, बल्कि सीधे आपकी कुंडली से तैयार की जाती है।
1 से 2 दिनों के भीतर, ताकि पितृ पक्ष के दौरान आप सही समय पर उपाय कर सकें।
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पितृ पक्ष के दौरान हम यह रिपोर्ट इस विशेष कीमत पर दे रहे हैं। उपायों का पूरा प्रभाव पितृ पक्ष के दौरान ही होता है, और हम चाहते हैं कि उपाय करने का समय रहते रिपोर्ट आपके पास हो।
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आपके पास जो भी सबसे करीबी समय हो, उसे दर्ज करें। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि कौन सा निष्कर्ष सटीक समय पर निर्भर करता है।
बिल्कुल नहीं। यह रिपोर्ट आपको उन कमज़ोरियों के साथ-साथ आपकी कुंडली के रक्षक योगों के बारे में भी बताती है। अधिकांश कुंडलियों में दोनों ही मौजूद होते हैं।
नहीं। दक्षिण दिशा में जल चढ़ाना, भोजन का एक हिस्सा निकालना या मंत्र जाप करना—इनमें किसी पंडित, महंगे अनुष्ठान या यात्रा की आवश्यकता नहीं है।
हाँ। रिपोर्ट में बताया गया है कि शास्त्रों में किसे अनुमति है, और ऐसे समान उपाय भी दिए गए हैं जिनसे बिना किसी शर्त के वही पुण्य प्राप्त होता है।
जीवित पिता के लिए यह उनका कर्तव्य है। लेकिन यह रिपोर्ट केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे आपके पूरे वंश (Lineage) का विश्लेषण करती है।
रिपोर्ट स्पष्ट रूप से ऐसा बताएगी और कारण भी स्पष्ट करेगी। साथ ही यह भी बताएगी कि आपके जीवन में तनाव असल में किन अन्य कारणों से है।
हाँ, बिल्कुल। चेकआउट के समय अपने विवरण के बजाय उनका जन्म विवरण दर्ज करें, और रिपोर्ट उनकी कुंडली के आधार पर तैयार की जाएगी।
साल के पंद्रह दिन विशेष रूप से इसी के लिए तय किए गए हैं, और अभी आप उन्हीं दिनों के बीच हैं। पखवाड़ा खत्म होने से पहले जानें कि आपकी कुंडली असल में क्या कहती है, और इसके लिए क्या उपाय करने हैं।