धूम्रो द्विवाहुर्वरदः सकेतुः मीनासनस्थः करवालपाणिः। किरीटकेयूरविभूषितो यः सदास्तु मे केतुगणः प्रशान्तः ।।

केतु मंत्र इसके लिए: सफलता के लिए।
जाप की संख्या और आवृत्ति: प्रतिदिन 1 माला। केतु यंत्र के सामने मंत्र का जाप करें। सुबह नित्यकर्म से निवृत्त होकर मंत्र का जाप करें।